बरबट्टी और खीरा की खेती से आत्मनिर्भर बने बाह्मनपाली के किसान राज कुमार साहू
रायपुऱ : कहते हैं कडी मेहनत, लगन और सही दिशा में किया गया प्रयास हर मुश्किल को आसान बना देता है। इसी बात को सच कर दिखाया है रायगढ जिले के खरसिया विकासखंड के ग्राम बाह्मनपाली के प्रगतिशील किसान राज कुमार साहू ने। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बरबट्टी और खीरा जैसी नकदी फसलों को अपनाया और सीमित संसाधनों के बावजूद आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की।
साहू ने उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, उन्नत बीज, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई के कारण अपने खेत के एक एकड़ क्षेत्र में बरबट्टी की खेती की और प्रति एकड़ 100 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त किया। बरबट्टी का बाजार मूल्य 35 रु. प्रति किलो रहा। प्रति एकड़ 2 लाख रूपए की लागत आने के बाद भी उन्होंने 1 एक लाख 50 हजार रूपए का शुद्ध लाभ कमाया।
बरबट्टी के साथ साहू ने एक एकड़ में खीरा की भी खेती की। समय पर जैविक खाद और उचित सिंचाई व्यवस्था के कारण प्रति एकड़ 120 क्विंटल उत्पादन मिला। खीरा का बाजार मूल्य 20 रु. प्रति किलो रहा। लागत लगभग एक लाख रूपए आने के बाद, उन्हें एक लाख 20 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। बरबट्टी और खीरा दोनों फसलों से साहू ने केवल दो एकड़ भूमि में 2 लाख 70 हजार रूपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह उनके दूरदर्शिता, परिश्रम और कृषि के प्रति समर्पण का परिणाम है। किसान राज कुमार साहू का मानना है कि आज के समय में फसल विविधिकरण और उच्च मूल्य वाली फसलें अपनाना आवश्यक है, उनकी सफलता से प्रभावित होकर आसपास के किसान भी नकदी फसलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
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