रायपुर। छत्तीसगढ़ की रत्नगर्भा धरती से खनिज संपदा को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और चमका देने वाली बड़ी सफलता सामने आई है। प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में चल रहे वैज्ञानिक अन्वेषण (खोज) के दौरान कुल पांच असली हीरे प्राप्त हुए हैं। इस बड़ी कामयाबी को राज्य में भविष्य के हीरा खनन प्रोजेक्ट्स और बहुमूल्य रत्नों की व्यावसायिक खोज के लिए एक बेहद सकारात्मक व क्रांतिकारी संकेत माना जा रहा है।

यह पूरा अन्वेषण कार्य एनएमडीसी-सीएमडीसी (NMDC-CMDC) के संयुक्त उपक्रम द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत साल 2023 से ही इस पूरे इलाके में आधुनिक मशीनों से व्यापक सर्वेक्षण और ड्रिलिंग की प्रक्रिया लगातार जारी थी। कंपनी ने स्ट्रीम सैडिमेंट सैंपलिंग, अत्याधुनिक भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और छह विशेष बोरहोल के माध्यम से जमीन के भीतर लगभग 500 मीटर की गहराई तक जाकर ड्रिलिंग का काम पूरा किया था।

200 टन मलबे की प्रोसेसिंग के बाद सामने आया 'जन्नत का टुकड़ा'

हीरे की खोज की यह प्रक्रिया बेहद जटिल और वैज्ञानिक रही। अन्वेषण टीम द्वारा चिन्हित किए गए खनिज क्षेत्र से करीब 200 टन कच्ची सामग्री और मिट्टी के नमूनों को एकत्रित किया गया था। छत्तीसगढ़ में जांच की उच्च तकनीक न होने के कारण, इस भारी-भरकम सामग्री को पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के पन्ना में स्थित 'एनएमडीसी डायमंड माइनिंग प्रोजेक्ट' में विशेष परीक्षण और बारीक प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था। पन्ना की लैब में हुई कड़े वैज्ञानिक परीक्षण और वॉशिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद मलबे में से कुल पांच असली हीरे छानकर निकाले गए, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट दर्ज किया गया है।

मिले हीरों का पूरा ब्योरा; जेम और नॉन-जेम क्वालिटी शामिल

खनिज विभाग और एनएमडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मिले हुए पांच हीरों में आभूषणों में इस्तेमाल होने वाले बेहद कीमती जेम क्वालिटी के साथ-साथ औद्योगिक इस्तेमाल वाले नॉन-जेम हीरे भी शामिल हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • 0.19 कैरेट का चमकीला सफेद हीरा (जेम क्वालिटी)

  • 0.06 कैरेट का पारदर्शी सफेद हीरा (जेम क्वालिटी)

  • 0.32 कैरेट का नायाब पीले रंग का हीरा (नॉन-जेम क्वालिटी)

  • 0.59 कैरेट का गहरे भूरे रंग का हीरा (नॉन-जेम क्वालिटी)

  • 0.06 कैरेट का हल्का भूरा हीरा (नॉन-जेम क्वालिटी)

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: फिलहाल पन्ना के 'स्ट्रॉन्ग रूम' में कैद हुए हीरे

एनएमडीसी-सीएमडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रदीप कुमार द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चूंकि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में इन बेशकीमती हीरों के सुरक्षित भंडारण और मूल्यांकन के लिए कोई विशेष लॉकर या हाई-टेक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, इसलिए सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए प्राप्त सभी पांचों हीरों को मध्यप्रदेश के पन्ना स्थित एनएमडीसी के मुख्य 'स्ट्रॉन्ग रूम' में पूरी सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच महफूज रखवा दिया गया है।

सीएम विष्णुदेव साय बोले— "प्रदेश के आर्थिक विकास को मिलेगा नया आयाम"

इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे राज्य के गौरवशाली भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया है। सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। इन संसाधनों का वैज्ञानिक, आधुनिक और सतत उपयोग प्रदेश की आर्थिक प्रगति को एक बिल्कुल नई ऊंचाई पर ले जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में खनिज क्षेत्र में बढ़ने वाली इन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

व्यावसायिक खनन की बढ़ी उम्मीदें; विशेषज्ञों की टिकी नजरें

बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में शुरुआती अन्वेषण के पहले ही चरण में हीरे मिलने के बाद अब इस पूरे बेल्ट में बड़े स्तर पर विस्तृत व्यावसायिक खनन (कमर्शियल माइनिंग) को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। भू-वैज्ञानिकों और खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि इस ब्लॉक में आगे होने वाले खोदाई और रिसर्च कार्यों से इस क्षेत्र की वास्तविक खनिज क्षमता और हीरों के विशाल भंडार का सटीक आकलन किया जा सकेगा, जो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ को देश का मुख्य हीरा उत्पादक राज्य भी बना सकता है।