देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से नवाजी गईं बुधरी ताती
रायपुर| राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार (23 जून) को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की महान विभूतियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से अलंकृत किया। देश सेवा और समाज में असाधारण योगदान देने वाली इन हस्तियों में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की जानी-मानी समाजसेविका डॉ. बुधरी ताती भी शामिल थीं, जिन्हें महामहिम राष्ट्रपति ने 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा।
जानिए कौन हैं आदिवासी अंचल की प्रेरणा डॉ. बुधरी ताती
डॉ. बुधरी ताती को यह सर्वोच्च सम्मान उनके निस्वार्थ लोक कल्याण और मानवीय कार्यों के लिए दिया गया है। वे दंतेवाड़ा के हीरानगर की मूल निवासी हैं और साल 1984 से लगातार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने बस्तर के सबसे दुर्गम और अंदरूनी गांवों में जाकर शोषित व वंचित महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का अभूतपूर्व काम किया है।
ताती जब महज 15 वर्ष की थीं, तब उन्हें साल 1984-85 के दौरान गुरमगुंडा आश्रम के श्रद्धेय लखमू बाबा से लोक सेवा की प्रेरणा मिली थी। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति से बाकायदा ट्रेनिंग ली और पूरी निष्ठा के साथ बस्तर के जंगलों और गांवों में जनजातीय समाज के उत्थान में जुट गईं।
नारी सशक्तिकरण और कुरीतियों के खिलाफ जंग
डॉ. बुधरी ताती ने सुदूर वनांचलों में घूम-घूमकर महिला अधिकारों की अलख जगाई। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और अन्य लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार से जोड़कर पैरों पर खड़ा किया। इसके अलावा, उन्होंने स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ग्रामीण इलाकों में नशाखोरी को खत्म करने के लिए उन्होंने कई बड़े आंदोलन भी चलाए। समाज को ही अपना परिवार मानने वाली बुधरी ताती ने कभी विवाह नहीं किया और अपना समूचा जीवन जनहित में लगा दिया। यही वजह है कि स्थानीय ग्रामीण उन्हें आदर और स्नेह से ‘बुआ’ या ‘ताती’ कहकर पुकारते हैं।
सराहनीय कार्यों के लिए मिल चुके हैं कई सम्मान
सच्चे अर्थों में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली डॉ. बुधरी ताती को अब तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा 22 से अधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए जा चुके हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय स्तर के बड़े सम्मान भी शामिल हैं। अब उनके खाते में 23वें और सबसे बड़े गौरव के रूप में देश का प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार भी जुड़ गया है, जिससे पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है।
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