रोजाना खाना बनाते समय इन 7 बातों का रखें ध्यान, परिवार रहेगा स्वस्थ
आज की इस आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत को सबसे ऊपर रखना बेहद जरूरी हो गया है। इस दिशा में हम केवल क्या खा रहे हैं, यही मायने नहीं रखता, बल्कि भोजन को किस तरीके से पका रहे हैं, यह भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रसोई में खाना बनाते समय अपनाई गई कुछ छोटी-छोटी और समझदारी भरी आदतें भोजन के पोषक तत्वों को बरकरार रखती हैं। पकाने के दौरान बरती गई ये सावधानियां हमें लंबे समय तक कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों के खतरों से सुरक्षित रखने में मददगार साबित होती हैं।
चम्मच से नापकर करें तेल का इस्तेमाल, दिल रहेगा दुरुस्त
अक्सर घरों में देखा जाता है कि लोग बिना किसी अंदाजे या माप के सीधे डिब्बे से कड़ाही में तेल उड़ेल देते हैं, जिससे भोजन में जरूरत से ज्यादा फैट (वसा) और अनचाही कैलोरी शामिल हो जाती है। इस आदत को बदलने के लिए हमेशा तेल डालते समय चम्मच का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। चम्मच से नापकर तेल डालने से इसकी मात्रा नियंत्रित रहती है। कम तेल और सीमित चिकनाई में तैयार किया गया भोजन हमारे दिल (हृदय) को स्वस्थ रखता है। यह आदत मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल जमा होने जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।
तले-भुने खाने से दूरी है दीर्घायु होने की कुंजी
बाजार में मिलने वाले या घरों में अक्सर बनने वाले समोसे, पकौड़े, चिप्स और पूड़ी जैसे डीप-फ्राई (तले हुए) खाद्य पदार्थ जीभ को भले ही बहुत स्वादिष्ट लगें, लेकिन ये सेहत के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इनमें वसा और कैलोरी की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि इनका लगातार सेवन शरीर को डायबिटीज (मधुमेह) और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर कभी ऐसे भोजन का स्वाद लेना भी हो, तो इसे कभी-कभार और बेहद सीमित मात्रा में ही खाएं। अपने रोजाना के खान-पान में ताजी हरी सब्जियों, मौसमी फलों, दालों और अंकुरित अनाज को प्राथमिकता दें, जो शरीर को अंदर से मजबूती देते हैं।
तलने के बजाय अपनाएं कुकिंग के ये स्मार्ट तरीके
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए पारंपरिक रूप से भोजन को तेल में तलने के बजाय पकाने के आधुनिक और सेहतमंद विकल्पों को चुनना चाहिए:
-
भाप में पकाना (स्टीमिंग): सब्जियों या अन्य चीजों को भाप में पकाने से उनके भीतर मौजूद जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स (खनिज) नष्ट नहीं होते और उनका प्राकृतिक गुण बना रहता है।
-
भूनना या ग्रिल करना (रोस्टिंग/ग्रिलिंग): ग्रिल या रोस्ट किए गए खाद्य पदार्थ न के बराबर तेल में बहुत कम समय में तैयार हो जाते हैं और इनका स्वाद भी लाजवाब होता है।
-
उबालना (बॉयलिंग): हल्का उबालकर या कम आंच पर पकाया गया सादा भोजन हमारे पाचन तंत्र (डाइजेस्टिव सिस्टम) के लिए सबसे हल्का और सुपाच्य माना जाता है।
इसके अलावा, भोजन बनाते समय हमेशा ताजी सामग्रियों का ही चुनाव करें। सब्जियों को बहुत ज्यादा देर तक या अत्यधिक आंच पर न पकाएं, क्योंकि इससे उनके पोषक तत्व पूरी तरह जल जाते हैं। साथ ही, खाने में नमक और चीनी की मात्रा को हमेशा सीमित रखें। बाहर के अनहेल्दी जंक फूड या प्रोसेस्ड फूड की तुलना में घर का साफ-सफाई से बना ताजा भोजन हमेशा सबसे सुरक्षित, शुद्ध और सर्वोत्तम होता है।
राशिफल 22 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
किसान अब उन्नत तकनीक की ओर अग्रसर, पैडी ट्रांसप्लांटर विधि से धान रोपाई
मध्यप्रदेश पुलिस का नशे के विरुद्ध सख्त प्रहार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी गारंटी : खाद्य मंत्री राजपूत
अपनी मेहनत और समर्पण से बड़वानी बन रहा देश में कृषि, उद्यमिता एवं नवाचार का उदाहरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव