आमिर खान और कबीर खान की नई साझेदारी, सिलक्यारा टनल हादसे पर बनेगी फिल्म
आमिर खान प्रोडक्शंस, माइंड ब्लोइंग फिल्म्स और कबीर खान फिल्म्स ने मिलकर एक नए बड़े प्रोजेक्ट 'सिलक्यारा 41' का आधिकारिक ऐलान किया है।
यह आगामी फिल्म भारत के उत्तराखंड राज्य की सिलक्यारा सुरंग में चलाए गए उस ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर आधारित होगी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। इस चुनौतीपूर्ण अभियान में ऑस्ट्रेलिया (विक्टोरिया) के मशहूर टनलिंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने बेहद अहम और सराहनीय भूमिका निभाई थी।
फिल्म के निर्देशन की कमान
इस सिनेमाई प्रोजेक्ट का निर्देशन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके मशहूर फिल्ममेकर कबीर खान करेंगे। वहीं, इस रोमांचक और वास्तविक कहानी को पर्दे पर उतारने के लिए पटकथा लेखन का काम ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने स्क्रीनराइटर एंड्रयू एनास्टासियोस (द वॉटर डिवाइनर फेम) ने किया है। यह फिल्म भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सिनेमा के बीच एक अभूतपूर्व साझेदारी को प्रदर्शित करेगी।
निर्माताओं ने जाहिर की अपनी खुशी
इस प्रोजेक्ट की घोषणा करते हुए फिल्म निर्माताओं ने साझा किया, 'माइंड ब्लोइंग फिल्म्स और आमिर खान प्रोडक्शंस के बीच इस महत्वपूर्ण सहयोग की जानकारी देते हुए हमें बेहद गर्व हो रहा है। सिलक्यारा टनल के सफल बचाव अभियान ने हम सभी को भीतर तक प्रभावित किया है। यह विपरीत परिस्थितियों में अटूट हौसले, मानवीय जज्बे, सूझ-बूझ और एकजुटता की एक बेमिसाल दास्तान है। इस खास मौके पर फिल्म का ऐलान करना हमारे लिए बेहद गौरवपूर्ण है, जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक और रचनात्मक संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंध
यह रणनीतिक घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल और शीर्ष नेतृत्व आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। ऐसे में यह फिल्म दोनों देशों के बीच कलात्मक और रणनीतिक साझेदारी का एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरेगी।
17 दिनों तक सांसें अटका देने वाला वो मंजर
उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग साल 2023 में उस वक्त वैश्विक सुर्खियों में आ गई थी, जब निर्माण कार्य के दौरान अचानक चट्टानें खिसकने और मलबे के कारण सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था। इस हादसे की वजह से वहां काम कर रहे 41 मजदूर अंदर ही फंस गए थे। देश-विदेश की तमाम एजेंसियों की कड़ी मशक्कत और 17 दिनों के लंबे इंतजार के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका था।
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