नियम ताक पर, रफ्तार बरकरार! इंदौर की सिटी बसों की मनमानी से यात्री परेशान
इंदौर: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एआईसीटीएसएल (AICTSL) की सिटी बसों की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। इंदौर शहर के भीतर 100 से अधिक विभिन्न रूटों पर संचालित होने के साथ-साथ आस-पास के उपनगरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आम जनता को सेवा देने वाली इन बसों के संचालन में लगातार भारी प्रशासनिक और व्यावहारिक लापरवाही उजागर हो रही है। सिटी बसों के चालक तय किए गए अधिकृत बस स्टॉप पर गाड़ी रोकने के बजाय मुख्य सड़क के बीचों-बीच, व्यस्त चौराहों और खतरनाक मोड़ों पर ही बसें खड़ी कर सवारियां उतारने और चढ़ाने लगे हैं। इस घोर नियम उल्लंघन के बावजूद न तो इन बसों के चालान बनाए जा रहे हैं और ना ही चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस (ट्रैफिक जवान) इन बेलगाम चालकों को टोकने या रोकने की जहमत उठा रहे हैं। कई बार तो चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल चालू होने के दौरान भी ये बसें बीच रास्ते में अड़ी नजर आती हैं।
शहर के व्यस्ततम मार्गों और प्रमुख चौराहों पर यह खतरनाक स्थिति हर रोज देखी जा सकती है। बीच सड़क पर इन भारी-भरकम बसों के अचानक रुक जाने से उनके पीछे चल रहे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को दुर्घटना से बचने के लिए आपातकालीन ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इस वजह से शहर में कई बार पीछे से आने वाले वाहनों की आपसी टक्कर और गंभीर सड़क हादसे भी हो चुके हैं।
बस स्टॉप को छोड़ मुख्य चौराहे के सिग्नल के नीचे ही खड़ी कर दी सिटी बस
इंदौर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील 'व्हाईट चर्च चौराहे' पर एक सिटी बस सरेआम बीच सड़क पर यात्रियों का इंतजार करती हुई देखी गई। यह एक ऐसा मार्ग है जहां ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है और सिग्नल ग्रीन (हरा) होते ही एक साथ सैकड़ों वाहन गति से निकलते हैं। परंतु, प्रशासनिक कार्रवाई के डर और ट्रैफिक जाम की चिंता से पूरी तरह बेपरवाह बस ड्राइवर आराम से लाल बत्ती और सिग्नल के ठीक नीचे ही बस को रोके खड़ा रहा, जबकि वहां से महज 200 मीटर की दूरी पर एक व्यवस्थित बस स्टॉप निर्मित है।
इसी प्रकार की एक अन्य बानगी 'बंगाली कॉलोनी चौराहे' पर भी देखने को मिली, जहां सुबह करीब साढ़े दस बजे के पीक-अवर (व्यस्ततम समय) में बस चालक बेहद गैर-जिम्मेदाराना ढंग से सर्विस रोड पर बस खड़ी कर सवारियां बटोर रहा था, जबकि सुबह के वक्त ऑफिस और स्कूल जाने वालों के कारण सर्विस रोड पर वाहनों का दबाव अत्यधिक रहता है।
सक्रिय ट्रैफिक सिग्नल और व्यस्त ब्रिज के नीचे ही उतार दिए यात्री
-
पिपलियाहाना चौराहे की लापरवाही: ग्रामीण रूट पर संचालित होने वाली एक सिटी बस पिपलियाहाना चौराहे पर बने ओवरब्रिज के ठीक नीचे लगभग पांच मिनट तक मुख्य सड़क पर खड़ी रही और वहीं से यात्रियों को उतारा गया। हैरान करने वाली बात यह है कि उस समय चौराहे पर लगा ट्रैफिक सिग्नल लगातार लाल और हरा हो रहा था, लेकिन चालक नियमों को ताक पर रखकर चौराहे को ब्लॉक किए खड़ा रहा।
-
जंजीरवाला-मालवा मिल मार्ग का हाल: ठीक इसी तरह की मनमानी जंजीरवाला से मालवा मिल जाने वाले मार्ग पर भी देखी गई, जहां बिना किसी डर के सिटी बस को मुख्य सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया गया, जिससे पीछे वाहनों की लंबी कतार लग गई।
तेज रफ्तार, खतरनाक ओवरटेकिंग और आक्रामक ड्राइविंग की लगातार मिल रही हैं शिकायतें
-
नागरिकों में रोष: शहर के आम वाहन चालकों और नियमित यात्रियों की ओर से इन सिटी बसों की अत्यधिक तेज रफ्तार (ओवरस्पीडिंग), बिना इंडिकेटर दिए अचानक लेन बदलने, बिना कोई संकेत दिए मोड़ों पर गाड़ी मोड़ने और निर्धारित स्टॉपेज के बाहर कहीं भी सवारियां बैठाने-उतारने की शिकायतें लगातार परिवहन विभाग को मिल रही हैं।
-
सोशल मीडिया पर नाराजगी: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और विभिन्न नागरिक मंचों पर भी इंदौर के सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों ने इन सिटी बस चालकों के हिंसक और आक्रामक ड्राइविंग व्यवहार को लेकर साक्ष्यों के साथ शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट (HSRP) के अनिवार्य नियमों की भी खुली अवहेलना
यातायात नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ ये बसें परिवहन विभाग के अन्य कड़े नियमों को भी ठेंगा दिखा रही हैं। मध्य प्रदेश शासन द्वारा शहर के सभी छोटे-बड़े वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट (HSRP) लगाना पूरी तरह अनिवार्य किया जा चुका है और ऐसा न करने पर आम जनता पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। इसके विपरीत, एआईसीटीएसएल की बड़ी संख्या में दौड़ रही सिटी बसों पर आज भी पुरानी और सामान्य नंबर प्लेट ही लगी हुई दिखाई देती हैं। हालांकि, परिवहन विभाग और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) समय-समय पर एचएसआरपी चेकिंग का अभियान चलाने का दावा करते हैं और बस ऑपरेटरों को भी कड़े निर्देश देने की बात कहते हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था का हिस्सा होने के कारण इन बसों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
क्या कहते हैं नियम? सार्वजनिक सुरक्षा और मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन पर उठे सवाल
केंद्रीय मोटर व्हीकल एक्ट और स्थापित यातायात नियमों के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक परिवहन वाहन या लोक सेवा यान को केवल और केवल उनके लिए निर्धारित किए गए बस स्टॉप और बे (Bus Bays) पर ही यात्रियों को चढ़ाने या उतारने की विधिक अनुमति है। व्यस्त सड़क के बीचों-बीच या चौराहों पर वाहन को अचानक रोकना न केवल यातायात प्रवाह को पूरी तरह बाधित करता है, बल्कि यह पीछे से आ रहे निर्दोष वाहन चालकों के लिए जानलेवा दुर्घटना का कारण भी बनता है। इसके बावजूद इंदौर के व्यस्ततम मार्गों पर इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
100 से अधिक रूट और सैकड़ों बसों का विशाल नेटवर्क संभालती है एआईसीटीएसएल
इंदौर: एआईसीटीएसएल (AICTSL) के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंदौर शहर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में विभिन्न श्रेणियों की सैकड़ों सार्वजनिक बसों का संचालन किया जाता है। इस विशाल नेटवर्क के अंतर्गत परंपरागत सिटी बसें, पर्यावरण अनुकूल सीएनजी (CNG) बसें, आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें (i-Bus) और अन्य सूत्र सेवा की बसें शामिल हैं। वर्तमान में शहर भर में 60 से अधिक विस्तृत सिटी बस रूट और 300 से ज्यादा बस स्टॉप इस बड़े नेटवर्क का मुख्य हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन हजारों की संख्या में आम नागरिक, कामकाजी लोग और छात्र-छात्राएं सफर करते हैं। इतने बड़े नेटवर्क में चालकों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया किसी भी दिन बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है।
मल्हार में खुली छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा
विश्व कप के रण में मध्यप्रदेश का गौरव: हॉकी इंडिया की विश्व कप टीम में हॉकी अकादमी के एसोसिएट खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद का चयन
मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई
स्वस्थ पशुधन, समृद्ध किसान: मुंगेली में 582 शिविरों से बदली पशुपालन की तस्वीर
बालोद में असर दिखा रही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना