इंदौर| इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढ़रीनाथ थाने में कई घंटों तक मैराथन पूछताछ की गई। जैसे ही उनके लंबे समय तक थाने में रोके जाने की सूचना स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिली, भारी संख्या में उनके समर्थक थाने के बाहर जमा हो गए। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा समेत कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी मौके पर पहुंच गए। थाने के बाहर जमकर नारेबाजी हुई, जिससे अचानक राजनीतिक पारा काफी गर्मा गया। हालांकि, पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने चौकसे को वहां से जाने दिया।

नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने मीडिया से खुलकर बातचीत की और शासन-प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि हाल ही में इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर आयोजित नीट (NEET) पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्टी ने छात्रों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया था, और इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्हें अपना बयान दर्ज कराने के लिए थाने का नोटिस भेजा गया था।

बयान बार-बार लिखने और बदलने का आरोप

चौकसे ने दावा किया कि पुलिस थाने के भीतर उनका बयान कई बार लिखा और बार-करीब बदला गया। उनके अनुसार, उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराए गए और उन्हें बेवजह घंटों तक थाने में बैठाकर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई किसी उच्च स्तर के राजनीतिक दबाव और निर्देशों के तहत की गई है। हालांकि, इन तमाम आरोपों पर पुलिस की तरफ से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।

राजनीतिक दबाव और दोहरे मापदंड का आरोप

कांग्रेस नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि यह पूरी कार्रवाई केवल एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सोची-समझी राजनीतिक बदले की भावना का हिस्सा है। चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया कि छह महीने पुराने एक पुराने मामले को अचानक से हवा दी गई है, जबकि कांग्रेस पार्टी लगातार प्रदेश के छात्रों, किसानों और अन्य ज्वलंत जनमुद्दों पर मुखर होकर आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस पूरे देश में युवाओं और छात्रों की आवाज बुलंद कर रही है, और इंदौर में भी पार्टी ने यही जिम्मेदारी निभाई है।

चौकसे ने आगे कहा कि कुछ समय पूर्व कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुए विवाद के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन और पथराव किया था, जिसमें कई कांग्रेसी कार्यकर्ता घायल हुए थे। उनका आरोप है कि उस घटना में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ तुरंत नामजद एफआईआर दर्ज की गई, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ केवल अज्ञात में मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली गई। कांग्रेस का मानना है कि विपक्ष की आवाज को कुचलने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।

कांग्रेस ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

थाने में हुई इस लंबी पूछताछ के बाद कांग्रेस ने कड़े तेवर दिखाते हुए संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन खड़ा करेंगे। चिंटू चौकसे ने ऐलान किया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों और नेताओं को इस प्रकार बेवजह थानों में घंटों बैठाकर प्रताड़ित किया जाएगा, तो कांग्रेस इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन मानेगी।