रायपुर| छत्तीसगढ़ के निवासियों के लिए एक बहुत ही अच्छी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना' के तहत अब बहुत जल्द प्रदेश में आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पर्यावरण-अनुकूल ई-बस सेवा की शुरुआत सबसे पहले दुर्ग-भिलाई शहर से की जाएगी। दुर्ग-भिलाई के सफल संचालन के बाद इस आधुनिक परिवहन सेवा को बिलासपुर और राजधानी रायपुर में भी शुरू करने की पूरी योजना तैयार कर ली गई है। हालाँकि, राजधानी रायपुर में ई-बस सेवा को पूरी तरह से शुरू होने में अभी लगभग 1 साल तक का समय और लग सकता है।

3 महीने के भीतर शुरू हो सकती हैं बसें

राजधानी रायपुर में ई-बसें चलाने के मार्ग में अभी कुछ जरूरी डिपो और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूरा नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, जिम्मेदार अधिकारियों का यह दावा है कि दुर्ग-भिलाई में इन बसों के सुचारू संचालन के लिए एजेंसी का चयन करने के साथ-साथ सभी जरूरी बुनियादी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर में भी अगले 3 महीनों के भीतर ई-बस सेवा शुरू हो जाएगी। हालांकि, इससे पहले इस सेवा को दिसंबर 2025 तक शुरू किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से यह तय समयसीमा के भीतर शुरू नहीं हो सकी थी।

छत्तीसगढ़ के लिए कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों की मिली थी स्वीकृति

आपको बता दें कि वर्ष 2024 में 'पीएम ई-बस सेवा योजना' के तहत छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख और बड़े शहरों के लिए कुल 240 नई इलेक्ट्रिक बसों को केंद्रीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इन शहरों में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा के नाम शामिल थे। इन सभी स्वीकृत बसों में से अकेले राजधानी रायपुर को सबसे अधिक 100 बसें, बिलासपुर को 50 बसें, दुर्ग-भिलाई को 50 और कोरबा को 40 इलेक्ट्रिक बसें आधिकारिक तौर पर आवंटित की गई हैं। हालांकि, डेढ़ वर्ष से अधिक लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक प्रदेश के किसी भी शहर में ई-बस सेवा धरातल पर शुरू नहीं हो पाई थी।

निजी वाहनों और पुरानी बसों पर निर्भर हैं यात्री

वर्तमान में शहरों के भीतर बसों के सुरक्षित संचालन के लिए चार्जिंग डिपो, हाई-पावर विद्युत कनेक्शन और अन्य आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। इस आधुनिक ई-बस सेवा के शुरू हो जाने से शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन पर निर्भरता को काफी हद तक घटाने में बहुत मदद मिलेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि प्रदेश के अधिकांश बड़े शहरों में आम यात्री पुरानी सिटी बसों और अपने निजी वाहनों पर ही पूरी तरह निर्भर हैं।